बिहार हर साल बाढ़ की भीषण समस्या झेलता है। गंगा और उसकी सहायक नदियाँ मानसून में उफान पर आकर जनजीवन को प्रभावित करती हैं। इस समस्या का एक बड़ा कारण नदियों में गाद (सिल्ट) का जमाव और जलधारा का सही दिशा में न बहना है। इसके समाधान के लिए नदियों से सिल्ट हटाना और नदियों को आपस में जोड़ना बेहद ज़रूरी है।

नदियों में सिल्ट जमाव और उसका असर
सिल्ट क्यों जमता है?
- नेपाल से आने वाली नदियाँ तेज़ गति से बहती हैं और अपने साथ भारी मात्रा में गाद (Silt) लाती हैं।
- जब यह नदियाँ बिहार की मैदानी सतह पर पहुंचती हैं तो उनकी गति धीमी हो जाती है और गाद नीचे जमने लगती है।
- लगातार जमाव से नदी की गहराई कम हो जाती है और पानी बाहर फैलकर बाढ़ का रूप ले लेता है।

समाधान: नदी ड्रेजिंग (Dredging)
- नदियों की नियमित ड्रेजिंग से नदी की गहराई बनी रहती है।
- पानी का प्रवाह तेज़ और नियंत्रित रहता है।
- गाद को हटाकर इसे निर्माण कार्यों (ईंट-सीमेंट, सड़कें, खेती की मिट्टी) में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- ड्रेजिंग से बाढ़ की तीव्रता कम होगी और जलभराव भी घटेगा।
नदियों को जोड़ने (River Linking) की ज़रूरत
क्यों ज़रूरी है?
- बिहार में कुछ नदियाँ (जैसे कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक) मानसून में उफान पर आ जाती हैं, जबकि कुछ नदियाँ (जैसे सोन, फल्गु) में पानी की कमी रहती है।
- नदियों को आपस में जोड़ने से एक नदी का अतिरिक्त पानी दूसरी नदी में डाला जा सकता है।
- इससे बाढ़ और सूखे दोनों की समस्या का समाधान होगा।
संभावित फायदे
- अतिरिक्त पानी का बेहतर प्रबंधन।
- खेती और सिंचाई के लिए सालभर पर्याप्त पानी।
- भूमिगत जल स्तर (Groundwater level) में सुधार।
- बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और सूखा प्रभावित इलाकों में पानी।
चुनौतियाँ
- भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव।
- परियोजना की लागत बहुत अधिक।
- राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय।
बिहार में नदी जोड़ने की संभावित योजनाएँ
- कोसी–गंगा लिंक प्रोजेक्ट
- कोसी नदी का अतिरिक्त पानी गंगा में डाला जाएगा।
- गंडक–गंगा लिंक
- गंडक नदी के पानी को गंगा में ले जाने की योजना।
- बूढ़ी गंडक–कमला–बागमती लिंक
- इन नदियों को जोड़कर बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने की योजना।
निष्कर्ष
बिहार में बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए सिर्फ राहत कार्य पर्याप्त नहीं हैं।
- सिल्ट हटाने (Dredging) से नदियों की गहराई और धारा को बनाए रखना होगा।
- नदी जोड़ने (River Linking) से अतिरिक्त पानी का सही प्रबंधन होगा और बाढ़ व सूखा दोनों से राहत मिलेगी।
अगर ये कदम सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और जनता की भागीदारी से लागू किए जाएँ तो आने वाले समय में बिहार बाढ़ से मुक्त होकर जल प्रबंधन का आदर्श मॉडल बन सकता है।

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